ग्राम प्रधानों को छह माह तक प्रशासक बनाए जाने के प्रावधान पर उठे संवैधानिक सवाल, 22 जून को होगी अगली सुनवाई
प्रयागराज, 5 जून। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, प्रयागराज के बी.ए. एलएल.बी. तृतीय वर्ष के दो छात्रों ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 25 मई 2026 को जारी किए गए अध्यादेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उक्त अध्यादेश संविधान के प्रावधानों और पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।
जनहित याचिका ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्र युधिष्ठिर वर्मा एवं आयुष पाण्डेय द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में ग्राम पंचायत चुनावों को स्थगित कर वर्तमान ग्राम प्रधानों को अगले छह माह तक "प्रशासक" के रूप में नियुक्त किए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
अध्यादेश की संवैधानिक वैधता पर सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 25 मई 2026 को जारी अध्यादेश के माध्यम से राज्य सरकार ने वर्तमान ग्राम प्रधानों को छह माह तक प्रशासक बनाए रखने का प्रावधान किया है, जिससे पंचायत चुनावों को टालने का मार्ग प्रशस्त होता है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243E की मूल भावना के विपरीत है। संविधान पंचायती संस्थाओं के लिए समयबद्ध और नियमित चुनावों की गारंटी देता है तथा स्थानीय स्वशासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है।
"अपरिहार्य परिस्थितियों" के आधार पर विस्तार पर आपत्ति
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों के कार्यकाल विस्तार को "अपरिहार्य परिस्थितियों" तथा "जनहित" जैसे व्यापक आधारों पर उचित ठहराने का प्रयास किया है, जबकि इसके समर्थन में कोई स्पष्ट संवैधानिक या तार्किक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार इस प्रकार का कदम लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधिक शासन व्यवस्था को प्रभावित करता है।
पूर्व के न्यायिक निर्णय का भी दिया गया हवाला
याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय Prem Lal Patel बनाम State of Uttar Pradesh का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उस मामले में न्यायालय ने इसी प्रकार के अध्यादेश को असंवैधानिक और Ultra Vires घोषित किया था।
विधि छात्रों का तर्क है कि वर्तमान मामला भी उन्हीं संवैधानिक सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है और न्यायालय को इस पर हस्तक्षेप करना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था की निरंतरता का मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि ग्राम स्तर पर लोकतांत्रिक शासन, नियमित चुनाव और जनप्रतिनिधिक उत्तरदायित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि पंचायत चुनावों की प्रक्रिया को शीघ्र बहाल किया जाए तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की संवैधानिक संरचना को सुरक्षित रखा जाए।
हाईकोर्ट ने याचिका को माना सुनवाई योग्य
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका को प्रथम दृष्टया विचारणीय (Maintainable) मानते हुए मामले को आगे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
मामले की सुनवाई 4 जून 2026 को माननीय न्यायमूर्ति एस. डी. सिंह की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रकरण को आगे विचारणीय मानते हुए अगली सुनवाई की तिथि 22 जून 2026 निर्धारित की।
अब मामले की विस्तृत सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर की पीठ के समक्ष 22 जून को होगी।
विधि छात्रों की पहल चर्चा में
कानून के विद्यार्थियों द्वारा दाखिल यह जनहित याचिका अकादमिक और विधिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्वशासन, पंचायती राज व्यवस्था और संवैधानिक लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर आधारित यह मामला आगामी सुनवाई में महत्वपूर्ण कानूनी बहस का केंद्र बन सकता है।
Allahabad High Court Hears PIL Filed by Law Students Challenging UP Panchayat Ordinance 2026
ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्रों द्वारा यूपी सरकार के 25 मई 2026 के पंचायत अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई। अगली सुनवाई 22 जून को होगी।
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