इलाहाबाद विश्वविद्यालय : प्रैक्टिकल में कम-ज्यादा अंक देने पर अब देना होगा कारण



इलाहाबाद विश्वविद्यालय : प्रैक्टिकल में कम-ज्यादा अंक देने पर अब देना होगा कारण

प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षा को लेकर अहम बदलाव किया गया है। अब यदि किसी विद्यार्थी को 50% से कम या 90% से अधिक अंक दिए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षक को इसका स्पष्ट औचित्य (जस्टिफिकेशन) देना होगा। यह निर्णय हाल ही में कुलपति की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस नए नियम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। इसके साथ ही जिन विद्यार्थियों को कम अंक मिलते हैं, उनके लिए अनिवार्य रूप से रिमेडियल (सहायक) कक्षाएं भी चलाई जाएंगी, ताकि उनकी पढ़ाई में सुधार हो सके।

नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने के बाद विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किए गए हैं। अब आंतरिक मूल्यांकन (सेशनल/सीआईए) को भी अनिवार्य किया गया है। स्नातक स्तर पर छात्रों को पहले दो वर्षों में दो मेजर और एक माइनर विषय पढ़ना होगा, जबकि तीसरे वर्ष में केवल मेजर विषयों पर फोकस रहेगा। पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि सामान्यतः कॉपी जांचने वाले शिक्षक यदि सामान्य से अधिक अथवा कम अंक देते हैं तो उस उत्तरपुस्तिका में टिप्पणी दर्ज करते हैं। यह उसी प्रैक्टिस की पुष्टि है ताकि अगर कॉपी पुनः देखी जाए तो अंक देने की वजह स्पष्ट रहे।

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