डा. अम्बेडकर हर वर्ग के नेता थे: प्रो. आदेश कुमार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में डा. अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक व्याख्यान
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में बुधवार को अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता प्रो. आदेश कुमार ने अम्बेडकर की राष्ट्रीयता और भारतीयता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डा. अम्बेडकर केवल एक विशेष वर्ग के नेता नहीं थे, वह सभी के थे। ‘वेटिंग फार वीजा’ आत्मकथा किसी देश का वीजा नहीं बल्कि उनके संघर्षों की कहानी है। अम्बेडकर किन परिस्थितियों में अम्बेडकर बने, उनका जीवन सामाजिक विभेद से भरा हुआ था। अनेक मतभेदों के साथ गाँधी और अम्बेडकर में समानता थी। इन दोनों ने सबके भले के लिए हथियार नहीं कलम उठाया।
प्रो. आदेश कुमार ने अम्बेडकर के विधि कार्यों का मूल्यांकन करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका रही है. वे आधुनिक भारत के शिल्पकार हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग से शुरू होकर न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर खत्म होती है। यह आर्टिकल 14 समानता से शुरू होती है। उन्होंने अनुच्छेद 19, 21 और अनुच्छेद 32 पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को भारतीय संविधान की आत्मा कहा है।
आधी आबादी की महत्ता को अम्बेडकर भारत के विकास के मामले में समझते थे। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर का नारीवादी दर्शन सन 1938 के पास ही शुरू हो गया था। उन्होंने संविधान निर्माण के समय ही नारीवादी दर्शन को भी साथ में रखा। हिन्दू कोड बिल पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रो. कुमार ने कहा कि अम्बेडकर ने हिन्दू कोड बिल लागू कराने के प्रयास से ही इस्तीफा दे दिया और उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। उनके समर्थन में कुछ हद तक नेहरू थे तो उनका विरोध तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भी किया।
विशिष्ट वक्ता प्रो. बालकेश्वर ने कहा कि अम्बेडकर के विचारों की रेखा बढ़ती जा रही है और एक दिन उनके सपनों का भारत जरूर बनेगा। अम्बेडकर के ऐतिहासिक पक्षों पर बात रखते हुए उन्होंने कहा यह देश की विडंबना है कि समाज वर्ग, वर्ण, और जाति में बंटा हुआ था। अम्बेडकर ने तीन लोगों को अपना गुरु माना है बुद्ध, कबीर और जोतिबा फुले। भारत में सच्चा लोकतंत्र फुले के बताए रास्ते पर ही चलकर आ सकता है। अम्बेडकर ने समाज के लिए शिक्षित हो, संगठित हो और संघर्ष करो का नारा दिया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. लालसा यादव ने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर ने समाज की कमियों पर प्रहार किया। उन्होंने 35 हजार किताबों को पढ़ा था। उन्होंने निर्वाण के लिए बुद्ध की तरह सभी का आव्हान किया, इसलिए उन्हें बोधिसात्व कहा जाता है। उन्होंने समानता के अधिकार को सबसे पहले रखा था।
इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. जी. राजू और डॉ. जनार्दन ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ गाजुला राजू ने और धन्यवाद डॉ सुरेन्द्र कुमार ने किया। कार्यक्रम में प्रो. राकेश सिंह, प्रो. सूर्यनारायण, प्रो. चंदा देवी, प्रो. सुनील विक्रम, प्रो. बसंत त्रिपाठी, डॉ सुजीत कुमार सिंह, डॉ अमृता, डॉ सुरभी त्रिपाठी, डॉ सुनील कुमार सुधांशु, डॉ संतोष सिंह, डॉ लक्ष्मण गुप्ता, डॉ वीरेंद्र मीना, डॉ अमितेश, डॉ दीनानाथ मौर्या, डॉ उमेश, डॉ . मोहना, डॉ. संदीप मेघवाल और डॉ. रजनीश मीना सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी ाामिल रहे।

